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अक्षय तृतीया पर गौतम अदाणी ने तारंगा जैन मंदिर में की पूजा-अर्चना
अदाणी ग्रुप के चेयरमैन गौतम अदाणी और उनकी पत्नी डॉ. प्रीति अदाणी ने रविवार, 19 अप्रैल 2026 को अक्षय तृतीया के पावन अवसर पर गुजरात के तारंगा पहाड़ियों में स्थित श्री अजितनाथ भगवान श्वेतांबर जैन देरासर में दर्शन कर पूजा-अर्चना की। गौतम अदाणी और डॉ. प्रीति अदाणी लगभग सुबह 7:45 बजे मेहसाणा जिले के खेरालू तालुका स्थित दाभोड़ा हेलीपैड पहुंचे। यहां जैन समुदाय के सदस्यों ने उनका स्वागत किया, जिसके बाद वे तारंगा पहाड़ियों में स्थित तीर्थस्थल के लिए रवाना हुए। अक्षय तृतीया के अवसर पर श्रद्धालु सुबह से ही बड़ी संख्या में एकत्र होने लगे थे, क्योंकि यह दिन धार्मिक परंपराओं में अत्यंत शुभ और पवित्र माना जाता है।
यह मंदिर जैन धर्म के दूसरे तीर्थंकर भगवान श्री अजितनाथ को समर्पित है। इसका निर्माण 12वीं शताब्दी में हुआ था और इसे सोलंकी शासक राजा कुमारपाल से भी जुड़ा माना जाता है। यह स्थल जैन समुदाय के लिए एक महत्वपूर्ण और प्रतिष्ठित तीर्थस्थल है।
गौतम अदाणी ने मंदिर के गर्भगृह में जाकर पूजा-अर्चना की और मंदिर परिसर में कुछ समय बिताया। उन्होंने मंदिर परिसर में कैंटीन का दौरा किया, जहां तीर्थयात्री दर्शन के दौरान एकत्र होते हैं।
दर्शन के दौरान गौतम अदाणी ने मंदिर ट्रस्टी सचिन अशोकभाई शाह से मुलाकात की। इस बैठक में तीर्थयात्रियों की सुविधाओं में सुधार के पर चर्चा हुई। बातचीत का केंद्र बिंदु मंदिर तक पहुंच, आधारभूत सुविधाओं और व्यवस्थाओं को बेहतर बनाना रहा, साथ ही मंदिर की वास्तुकला, विरासत और आध्यात्मिक गरिमा को संरक्षित रखने पर भी विशेष जोर दिया गया।
यह यात्रा हाल के दिनों में हुए धार्मिक आयोजनों की श्रृंखला का हिस्सा है।
अदाणी ग्रुप तारंगा पहाड़ियों में पेड़ लगाने के प्रयासों में मदद कर रहा है। यह पहल इस पवित्र स्थल इकोसिस्टम को फिर से स्थापित करने और प्राकृतिक संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए की जा रही है।
अक्षय तृतीया को हिंदू और जैन पंचांग में सबसे शुभ दिनों में से एक माना जाता है। यह दिन समृद्धि, नए आरंभ और दान-पुण्य से जुड़ा है। जैन परंपरा में यह दिन विशेष महत्व रखता है, क्योंकि मान्यता है कि इसी दिन ऋषभनाथ ने लंबे उपवास के बाद अपना पहला आहार ग्रहण किया था, जिससे साधुओं को आहार दान की परंपरा की शुरुआत मानी जाती है।
इससे पहले, इसी महीने की शुरुआत में हनुमान जयंती के अवसर पर गौतम अदाणी और उनके परिवार ने अयोध्या के राम मंदिर में भी पूजा-अर्चना की थी, जो भारत के प्रमुख तीर्थस्थलों में से एक है।


